मुक्तक शुस्मा अर्याल

शुस्मा अर्याल, चिदिका अर्घाखाँची हाल – काठमाडौं ।

 

घाइते मन मेरो चलाइ दियौ
माया को मन्दिर नै ढलाई दियौं!!

तिमि लाइ अपार माया गर्थे
दिनु सम धोका मलाई दियौं!!

तिमि संग हासेर बाचन चाहान्थे
यी आँखा भरि आखाम लाई दियौं!!

बेरथै मुटु मेरो छिया छिया पारि दियौं
अमृत को साटोमा बिस पिलाइ दियौं!!

तिमिलाई सम्झि मेरो पिडा यसरि रोयो
घाइते भनि दोबाटोमा मलाई छाडी दियो!!

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